Sunday, October 17, 2021
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गृहमंत्री शाह की बैठक में शामिल नहीं होने पर सीएम बघेल ने कहा-राजनीतिक चश्मे से नहीं देखें

रायपुर. रविवार को नई दिल्ली में गृहमंत्री अमित शाह ने नक्सल प्रभावित राज्यों के मुख्यमंत्रियों के साथ चर्चा की। इस बैठक में छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री को शामिल नहीं होने को लेकर चर्चा होती रही। हालांकि इस पर अपनी रखते हुए सीएम बघेल ने कहा कि बैठक में राज्य के मुख्य सचिव और डीजीपी (Chief Secretary and DGP) दोनों शामिल हुए हैं। उन्होंने कहा कि बैठक बुलाए जाने से बहुत पहले ही मैंने एक कार्यक्रम को अपना समय दे दिया था इसलिए मैं इसलिए नहीं जा पाया। इसे राजनीतिक चश्मे से नहीं देखा जाना चाहिए।

शाह ने बैठक में यह कहा

इधर नई दिल्ली में केंद्रीय गृह मंत्री एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह ने आज नई दिल्ली में वामपंथी उग्रवाद पर एक समीक्षा बैठक की अध्यक्षता की। बैठक में शाह ने कहा प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में केन्द्र सरकार नक्सल प्रभावित क्षेत्रों के विकास के लिए कटिबद्ध है। उन्होंने कहा कि यह आनंद का विषय है कि प्रधानमंत्री जी की अगुवाई में वामपंथी उग्रवाद पर नकेल कसने में केंद्र और राज्यों के साझा प्रयासों से बहुत सफलता मिली है। श्री शाह ने कहा कि एक तरफ जहां वामपंथी उग्रवाद की घटनाओं में 23 प्रतिशत की कमी आई है वहीं मौतों की संख्या में 21 प्रतिशत की कमी आई है।

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अमित शाह ने कहा कि दशकों की लड़ाई में हम एक ऐसे मुकाम पर पहुंचे हैं जिसमें पहली बार मृत्यु की संख्या 200 से कम है और यह हम सबकी साझा और बहुत बड़ी उपलब्धि है। उन्होंने कहा कि हम सब जानते हैं कि जब तक हम वामपंथी उग्रवाद की समस्या से पूरी तरह निजात नहीं पाते तब तक देश का और वामपंथी उग्रवाद से प्रभावित राज्यों का पूर्ण विकास संभव नहीं है। केंद्रीय गृह मंत्री ने कहा कि इसको खत्म किए बिना न तो लोकतन्त्र को नीचे तक प्रसारित कर पाएंगे और न ही अविकसित क्षेत्रों का विकास कर पाएंगे, इसलिए हमने अब तक जो हासिल किया है उस पर संतोष करने की बजाय जो बाकी है उसे प्राप्त करने के लिए गति बढ़ाने की जरूरत है।

शाह ने कहा कि  भारत सरकार कई सालों से राजनीतिक दलों पर ध्यान दिये बिना दो मोर्चों पर लड़ाई लड़ती रही है। श्री शाह ने कहा कि जो हथियार छोड़कर लोकतंत्र का हिस्सा बनना चाहते हैं उनका दिल से स्वागत है लेकिन जो हथियार उठाकर निर्दोष लोगों और पुलिस को आहत करेंगे, उनको उसी तरह जवाब दिया जायेगा।

उन्होंने कहा कि असंतोष का मूल कारण है आज़ादी के बाद पिछले 6 दशकों में विकास ना पहुंच पाना, इससे निपटने के लिए वहां तेज़ गति से विकास पहुंचाना और आम जनता और निर्दोष लोग उनके साथ ना जुड़ें, ऐसी व्यवस्था करना अति आवश्यक है। श्री शाह ने कहा कि प्रधानमंत्री के नेतृत्व में विकास हो रहा है और अब नक्सली भी ये बात समझ चुके हैं कि विकास होने पर निर्दोष लोग उनके बहकावे में नहीं आएंगे इसीलिए विकास की गति निर्बाध रूप से जारी रखना बहुत ज़रूरी है। इन दोनों मोर्चों पर सफल होने के लिए ये बैठक बहुत मह्त्वपूर्ण है।

उन्होंने राज्यों से आग्रह किया कि वामपंथी उग्रवाद से निपटने के लिए प्रभावित राज्यों के मुख्य सचिव कम से कम हर तीन महीने में पुलिस महानिदेशक और केन्द्रीय ऐजेंसियों के अधिकारियों के साथ समीक्षा बैठक करें, तभी हम इस लड़ाई को आगे बढ़ा सकते हैं। उन्होंने कहा कि पिछले दो साल में जिन क्षेत्रों में सुरक्षा पहुंच नहीं थी, वहां सुरक्षा कैंप बढ़ाने का काफी बड़ा और सफल प्रयास किया गया है, विशेषकर छत्तीसगढ़ में, साथ ही महाराष्ट्र और ओडिशा में भी सुरक्षा कैंप बढ़ाए गए हैं।

श्री शाह ने कहा कि अगर मुख्यमंत्री, मुख्य सचिव और पुलिस महानिदेशक के स्तर पर नियमित समीक्षा की जाती है, तो निचले स्तर पर समन्वय की समस्याएं अपने आप हल हो जाएंगी। अमित शाह ने कहा कि जिस समस्या के कारण पिछले 40 वर्षों में 16 हज़ार से अधिक नागरिकों की जान गई हैं, उसके ख़िलाफ़ लड़ाई अब अंत तक पहुंची है और इसकी गति बढ़ाने और इसे निर्णायक बनाने की ज़रूरत है।

बैठक में केन्द्रीय ग्रामीण विकास और पंचायती राज मंत्री, गिरिराज सिंह, जनजातीय मामलों के मंत्री अर्जुन मुंडा, दूरसंचार, सूचना-प्रौद्योगिकी और रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव, सड़क परिवहन और राजमार्ग राज्य मंत्री जनरल वी के सिंह और केन्द्रीय गृह राज्य मंत्री नित्यानंद राय भी उपस्थित थे। बैठक में बिहार, ओडिशा, महाराष्ट्र, तेलंगाना, मध्य प्रदेश और झारखंड के मुख्यमंत्री और आंध्र प्रदेश की गृह मंत्री, छत्तीसगढ़, पश्चिम बंगाल और केरल के वरिष्ठ अधिकारी, केन्द्रीय गृह सचिव, केन्द्रीय सशस्त्र पुलिस बलों के शीर्ष अधिकारी और केन्द्र तथा राज्य सरकार के अनेक वरिष्ठ अधिकारी भी शामिल हुए।

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