Thursday, August 11, 2022
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अब छत्तीसगढ़ के जशपुर का चाय भी बना रहा अपनी पहचान, यहां के बागान बन रहे Tourist Spot

रायपुर. Chhattisgarh के जशपुर जिले की पहचान यहां की विशिष्ट आदिवासी संस्कृति, प्राकृतिक पठारों एवं नदियों की सुंदरता तथा ऐतिहासिक रियासत से तो है ही,  लेकिन पिछले साढ़े तीन वर्षों से जशपुर की पहचान में एक नया नाम जुड़ गया है और ये पहचान अब देशव्यापी हो गयी है। अभी तक चाय की खेती के लिए लोग आसाम (Aasam) या दार्जिलिंग का ही नाम लेते रहे हैं, लेकिन जशपुर (Jashpur) में भी चाय की खेती होने लगी है जो पर्यटकों को  भी अपनी तरफ आकर्षित कर रही है।हम जानते हैं कि पर्वतीय एवं ठंडे इलाकों में ही चाय की खेती हो पाती है और छत्तीसगढ़ का जशपुर (Jashpur) जिला भी ऐसे ही भौगोलिक संरचना पर स्थित है।

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पठारी क्षेत्र होने एवं लैटेराइट मिट्टी (laterite soil) का प्रभाव होने की वजह से जशपुर में चाय की खेती के लिए अनुकूल वातावरण है। इसे देखते हुए जशपुर में चाय की खेती के लिए यहां चाय बागान की स्थापना की गयी है। खास बात ये है कि देश के अन्य हिस्सों में चाय की खेती के लिए कीटनाशक और रासायनिक खाद का इस्तेमाल होता है, लेकिन गोधन न्याय योजना की वजह से जशपुर के चाय बागानों में वर्मी कंपोस्ट (Vermi Compost) खाद का इस्तेमाल किया जाता है जो चाय के स्वाद को बढ़ाता ही है साथ ही स्वास्थ्य का भी खयाल रखता है।

Tea processing center की स्थापना

Chief Minister Bhupesh Baghel के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ सरकार ने जशपुर जिले के बालाछापर में 45 लाख रूपए की लागत से Tea processing center स्थापित किया है। यहां पर उत्पादन कार्य भी प्रारंभ कर दिया गया है और इस प्रसंस्करण केंद्र से सामान्य चाय एवं ग्रीन टी तैयार किया जा रहा है।  बालाछापर में वनविभाग के पर्यावरण रोपणी परिसर में Tea processing unit की स्थापना की गई है।  इस यूनिट में चाय के हरे पत्ते के प्रोसेसिंग  की क्षमता 300 किलोग्राम रोजाना की है।

टूरिस्म स्पॉट

जशपुर जिला मुख्यालय (Jashpur District Headquarters) से तीन किलोमीटर की दूरी पर पहाड़ी और जंगल के बीच स्थित सारूडीह चाय बागान (Sarudih Tea Garden) एक पर्यटन स्थल के रूप में भी लोकप्रिय होता जा रहा है। यहां रोजाना बड़ी संख्या में लोग चाय बागान देखने पहुंचते है। 18 एकड़ का यह बागान वन विभाग के मार्गदर्शन में महिला समूह द्वारा संचालित किया जा रहा है। सारूडीह के साथ ही सोगड़ा आश्रम में भी चाय की खेती के कारण जशपुर (Jashpur) जिले को एक नई पहचान और पर्यटकों को घूमने का एक नया स्थान मिला है।

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