Saturday, October 23, 2021
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शारदीय नवरात्रि Shardiya Navratri 2021: घटस्थापना के मुहूर्त और मां दुर्गा के नवरूपों के बारे में जानिए

शारदीय नवरात्रि Shardiya Navratri 2021: इस साल शारदीय नवरात्रि (Shardiya Navratri) पर्व 7 अक्टूबर से 15 अक्टूबर तक मनाया जाएगा। नवरात्रि के 9 दिनों में मां दुर्गा के नौ स्वरूपों की पूजा अर्चना की जाती है।

यह पर्व अश्विन मास के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि से प्रारंभ होकर नवमी तिथि मनाया जाता है। इसके बाद विजयादशमी पर्व (दशहरा) पर्व मनाया जाता है। श्रद्धालु नवरात्रि के दौरान पूरे श्रद्धा, भक्ति और विश्वास के साथ माता के नौ रूपों की आराधना करते हैं। आइये यहां जानते हैं घटस्थापना के मुहूर्त और माता के नवरूपों के बारे में-

शारदीय नवरात्रि 2021 कब है, जानें घटस्थापना मुहूर्त

  • आश्विन मास घटस्थापना वृहस्पतिवार, 7 अक्टूबर 2021
  • घटस्थापना मुहूर्त – सुबह 6.17 बजे से 7:07 बजे तक
  • अवधि – 50 मिनट्स
  • घटस्थापना अभिजित मुहूर्त – पूर्वान्ह 11:45 बजे से दोपहर 12:32 बजे तक
  • अवधि – 47 मिनट

मां दुर्गा के नौ स्वरूपों के बारे में जानिए

शैलपुत्री. मां दुर्गा का पहला रूप शैलपुत्री देवी का है। नवरात्रि के पहले दिन माता के इस रूप की पूजा की जाती है। पर्वताराज हिमाचल की पुत्री होने के कारण इन्हें शैलपुत्री के नाम से जाना जाता है।

ब्रह्मचारिणी. मां दुर्गा का द्वितीय स्वरूप ब्रह्मचारिणी देवी का है। मां पार्वती ने कठिन तपस्या करके भगवान शिव को वर के रूप में प्राप्त किया। इसके बाद इन्हें ब्रह्मचारिणी कहा गया।।

चंद्रघंटा. मां दुर्गा का तीसरा स्वरूप चंद्रघंटा का है। नवरात्रि के तीसरे दिन इनकी पूजा की जाती है। भगवान शंकर के मस्तक पर अद्धचंद्र घंटे के रूप में सुशोभित है।

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कूष्मांडा.  मां दुर्गा का चौथा स्वरूप कूष्मांडा देवी का है। नवरात्रि में चतुर्थ दिन माता कूष्मांडा की पूजा अर्चना की जाती है। माता ने ब्रह्मांड को उत्पन्न किया था इसलिए इन्हें कूष्मांडा माता कहा जाता है।

स्कंदमाता. मां दुर्गा के पांचवें रूप को स्कंदमाता के नाम से जाना जाता है। इनसे भगवान शिव के पुत्र कार्तिकेय या स्कंद का जन्म हुआ है। इसी कारण इन्हें स्कंदमाता कहा गया है।

कात्यायनी.  मां दुर्गा के छठवें स्वरूप को कात्यायनी देवी के नाम से जाना जाता है। कात्यायन ऋषि की साधना और तप से जन्म होने के कारण ये कात्यायनी देवी कही गई।

कालरात्रि. मां दुर्गा के सातवें स्वरूप को मां कालरात्रि कहा जाता है। मां कालरात्रि के रूप में  मां दुर्गा ने असुरों का नाश किया और देवों की रक्षा की।

महागौरी.  मां दुर्गा का आठवां स्वरूप मां महागौरी का है। अत्यंत कठोर तपस्या के कारण इनका वर्ण काला पड़ गया था। तब भगवान शिव ने गंगा जल छिड़क कर गौर वर्ण प्रदान किया। इसके कारण मां दुर्गा का यह रूप मां महागौरी के नाम से जाना जाता है।

सिद्धिदात्री. मां दुर्गा के नवें स्वरूप की मां सिद्धिदात्री के रूप में पूजा की जाती है।साधक  सिद्धियों की कामना से इनकी पूजा-अर्चना करते हैं। मां अपने भक्तों की मनोकामना पूरी करती है।

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