राहुकाल क्या है | जानें राहुकाल की अवधि के बारे में | What is Rahukal | ये कार्य होते हैं वर्जित

राहुकाल क्या है Rahukal Kya Hai: ज्योतिष के अनुसार राहु को एक अशुभ ग्रह माना गया है। राहुकाल में शुभ कार्य वर्जित माने गए हैं। इस काल किए गए हवन, पूजन, यज्ञ के शुभ फल या मनोवांछित फल प्राप्त नहीं होते हैं। इसके चलते राहुकाल में शुभ कार्य नहीं करना चाहिए। साथ ही हवन, यज्ञ, पूजा पाठ, कथा, मांगलिक आयोजन के दौरान राहुकाल पर विचार अवश्य कर लेना चाहिए। हालांकि राहु की प्रसन्नता के लिए जाने वाले हवन, यज्ञ आदि राहु काल में किए जा सकते हैं।

राहुकाल के दौरान विवाह, गृह प्रवेश, नया काम शुरू नहीं किया जाना चाहिए। इसके अलावा घर, सोना, कार या दूसरे सामान नहीं खरीदना चाहिए। वहीं पहले से शुरू हो चुके कार्य को राहुकाल में किया जा सकता है।

हर दिन राहु काल का एक निश्चित समय होता है। यह समय करीब 1 घंटे 30 मिनट की होती है। राहु काल, सूर्योदय व सूर्यास्त के बीत, दिन के 8 खंडों में से एक खंड है।

सूर्योदय व सूर्यास्त के स्थानीय समय में अंतर के कारण, राहु काल का समय व अवधि किसी भी दो जगहों के लिए समान नहीं होती है। इसके अलावाएक स्थान के लिए भी राहु काल का समय व अवधि सभी दिनों के लिये समान नहीं है, क्योंकि सूर्योदय तथा सूर्यास्त के समय में परिवर्तन होता रहता है। अर्थात राहु काल हर जगह तथा दिन के अनुसार बदलता रहता है। इसलिए हर दिन के राहुकाल का विचार करना चाहिए।

कब शुभ होता है राहुकाल

सूर्योदय के बाद पहले खंड का राहुकाल शुभ माना जाता है। यह लगभग डेढ़ घंटे तक रहता है। माना जाता है कि, यह अवधि सदैव राहु के प्रभाव से मुक्त रहती है। सोमवार को राहु काल दूसरे खंड में, शनिवार को तीसरे खंड में, शुक्रवार को चौथे खंड में, बुधवार को पांचवें खंड में, वृहस्पतिवार को छठवें खंड में, मंगलवार को सातवें व रविवार को आठवें खंड में रहता है। रात्रि में होने वाला राहुकाल कम लोकप्रिय है, क्योंकि ज्यादातर शुभ कार्य दिन में ही किए जाते हैं। मंगलवार, शुक्रवार व रविवार के दिन राहु काल का सप्ताह के अन्य दिनों की तुलना में अधिक प्रभाव पड़ता है। अतः शुभ कार्य शुरू करते समय राहुकाल का विचार जरूर करें।

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